Sunday, November 27, 2016
Monday, September 10, 2012
कार्यालय
कार्यालय
नारंगी रंग से सिक्त
काफी कप
पीली टीक की मेज पर स्थिर है अंगुलियाँ
सफेद बगुले से सराबोर हो लेपटोप पर लिखती है एक ओर दूरभाष
और है घूमता हुआ फलक निर्द्वन्द
कौन कहता है
यहाँ कार्य नहीं होता
(भले ही फाइलें और कागज
त्रिघातिय में न हों) पल पल पर रिंग टोन
आती हैं
चिन्नै , बढ़ोदा, जोरहट व मुम्बई की
बिहारी की सतसई से कम संक्षिप्त नहीं
नीली मयूर पंख की
तूलिका अदृश्य
समायोजित करती है
सहायता प्रपट व तकनीकी
सोडियम व मर्करी
लेम्पों से होता है
छाया व प्रकाश का संयुक्त वितरण स्पन्दन
पर्दों से छन छन कर
आती है सुगन्धि अकृत्रिम
- - - -
बाघ घुमावदार मार्ग पर पिंजड़े में बन्द हैं।
नारंगी रंग से सिक्त
काफी कप
पीली टीक की मेज पर स्थिर है अंगुलियाँ
सफेद बगुले से सराबोर हो लेपटोप पर लिखती है एक ओर दूरभाष
और है घूमता हुआ फलक निर्द्वन्द
कौन कहता है
यहाँ कार्य नहीं होता
(भले ही फाइलें और कागज
त्रिघातिय में न हों) पल पल पर रिंग टोन
आती हैं
चिन्नै , बढ़ोदा, जोरहट व मुम्बई की
बिहारी की सतसई से कम संक्षिप्त नहीं
नीली मयूर पंख की
तूलिका अदृश्य
समायोजित करती है
सहायता प्रपट व तकनीकी
सोडियम व मर्करी
लेम्पों से होता है
छाया व प्रकाश का संयुक्त वितरण स्पन्दन
पर्दों से छन छन कर
आती है सुगन्धि अकृत्रिम
- - - -
बाघ घुमावदार मार्ग पर पिंजड़े में बन्द हैं।
Friday, June 3, 2011
क्योंकि हम चाँद का चेहरा राबोटिक बना रहे हैं
क्योंकि हम चाँद का चेहरा राबोटिक बना रहे हैं
धर्म प्रकाश जैन
आज इन्दिरापुरम डूबा हुआ है धूल के उड़ते हुये बादलों से क्योंकि निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है पत्तियों के प्रतिदिन गर्त्त झाड़ने के बावजूद
पर्त्त दर पर्त्त जमती जाती है
सूख रहीं हैं
टूट कर गिर रहीं हैं
पक्षियों ने बहुत दिनों से यहाँ विचरण करना बन्द कर दिया है
लोग यहाँ टहलते नहीं हैं और औरतें घर से बाहर सड़क पर नहीं निकलती धूल प्रदूषण की पराकाष्टा मे जी रहा है इन्दिरापुरम
निर्माण कार्य रत
श्रमजीवियों के बच्चे खाँस –खाँस कर बेहाल हैं हर घर श्वांस कष्ट से ग्रसित हैं
उत्खनक यंत्रॉं पर प्राधिकारी वर्ग बैठा है
और निर्माण कार्य में लगी कम्पनियों में होड़ लगी है कुल बिक्री बढ़ाने में कौन कितना आगे बढ़ता है
सरकारी निर्गम के पहले
कौन कितना लाभ कमा पाता है
“परंतु निर्माण के भी नियम होते हैं आई एस ओ 14000 को ही बड़ी परियोजनाओं की
मान्यता प्राप्त हो
पर्यावरण प्रबन्ध पद्धति अपनाकर
प्रदूषण नियंत्रण कर
मनुष्य का स्वास्थ्य प्रथम प्राथमिकता बनाकर कार्य हो ”
परंतु ये नैतिक नियमों की बातें हैं सरकारी आदेश अल्प हैं
लोग आदतन चुप हैं लोग धीमे स्वर में कभी कुड़बुड़ाते भी हैं और पूँछते हैं क्या निर्माण कार्य ऐसे ही होते हैं ?
निर्माण कम्पनियाँ कहती है
“देश के नियंत्रण प्रदूषण नियम हम नहीं मानते
क्योंकि हम चाँद का चेहरा राबोटिक बना रहे हैं।“
धर्म प्रकाश जैन
आज इन्दिरापुरम डूबा हुआ है धूल के उड़ते हुये बादलों से क्योंकि निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है पत्तियों के प्रतिदिन गर्त्त झाड़ने के बावजूद
पर्त्त दर पर्त्त जमती जाती है
सूख रहीं हैं
टूट कर गिर रहीं हैं
पक्षियों ने बहुत दिनों से यहाँ विचरण करना बन्द कर दिया है
लोग यहाँ टहलते नहीं हैं और औरतें घर से बाहर सड़क पर नहीं निकलती धूल प्रदूषण की पराकाष्टा मे जी रहा है इन्दिरापुरम
निर्माण कार्य रत
श्रमजीवियों के बच्चे खाँस –खाँस कर बेहाल हैं हर घर श्वांस कष्ट से ग्रसित हैं
उत्खनक यंत्रॉं पर प्राधिकारी वर्ग बैठा है
और निर्माण कार्य में लगी कम्पनियों में होड़ लगी है कुल बिक्री बढ़ाने में कौन कितना आगे बढ़ता है
सरकारी निर्गम के पहले
कौन कितना लाभ कमा पाता है
“परंतु निर्माण के भी नियम होते हैं आई एस ओ 14000 को ही बड़ी परियोजनाओं की
मान्यता प्राप्त हो
पर्यावरण प्रबन्ध पद्धति अपनाकर
प्रदूषण नियंत्रण कर
मनुष्य का स्वास्थ्य प्रथम प्राथमिकता बनाकर कार्य हो ”
परंतु ये नैतिक नियमों की बातें हैं सरकारी आदेश अल्प हैं
लोग आदतन चुप हैं लोग धीमे स्वर में कभी कुड़बुड़ाते भी हैं और पूँछते हैं क्या निर्माण कार्य ऐसे ही होते हैं ?
निर्माण कम्पनियाँ कहती है
“देश के नियंत्रण प्रदूषण नियम हम नहीं मानते
क्योंकि हम चाँद का चेहरा राबोटिक बना रहे हैं।“
Tuesday, February 22, 2011
चरैवेति – चरैवेति
चरैवेति – चरैवेति
क्या उन संतप्त चेहरों
को देखा है
मातृभूमि छोड़ कर जाते हैं विदेशों को
दर्द अनुभव किया है उन सुर्ख गुलाबों का
गमलों से आ जाते हैं
फूलदानों पर
पूर्ण शशि घोर एकाकीपन लिये
और दूर चला जाता है
भोर में पिता सूर्य के प्रगट होने पर
बिछुड़ने का दुख दोनों को होता है
किंतु,
चरैवेति – चरैवेति.......
क्या उन संतप्त चेहरों
को देखा है
मातृभूमि छोड़ कर जाते हैं विदेशों को
दर्द अनुभव किया है उन सुर्ख गुलाबों का
गमलों से आ जाते हैं
फूलदानों पर
पूर्ण शशि घोर एकाकीपन लिये
और दूर चला जाता है
भोर में पिता सूर्य के प्रगट होने पर
बिछुड़ने का दुख दोनों को होता है
किंतु,
चरैवेति – चरैवेति.......
Thursday, September 23, 2010
आप नहीं हैं
आप नहीं हैं
आप नहीं हैं
यह सच है
अंकगणित की भाषा में
आप अकृत और शून्य हैं
किंतु आप एक अत्यधिक प्रभावशाली अंक हैं
और वह एक सशक्त प्रतिच्छाया की तरह
चल रहा है
सदैव मेरे साथ साथ
मैं आपको देखता हूँ
शुभ चन्दन की भांति
अपने शैशव की अनेक आयामों की स्मृतिओं में
मैं आपको अपने सामने खड़ा हुआ पाता हूँ
फलों से लदे दरख्त की तरह
मैं दौड़ता हूँ
भूमि से सागर की ओर
और अतिक्रूर घोरतम जंगलों से पर्वत श्रंखला की तरफ
और समूचे रास्तों पर
मैं आपको खड़े हुये पाता हूँ
हाथों में आशावादी रेखाचित्रों को लिये हुए
आप उस संयुक्त अंक के काल्पनिक भाग हैं
जिसको आप और मैं पूर्ण करते हैं
और जिससे न आपको या मुझको
अलग किया जा सकता
मैं जानता नहीं
इस अमूर्त्त की संरचना में
मै आपका कैसे वर्णन करूँ
यदि मैं एक असंतत वास्तविक अंक हूँ
आप मेरे अचेत विचारों के संसार के सुन्दर संयोजन में अनंत हैं।
Tuesday, September 21, 2010
संस्कार ने मनाया हिन्दी सप्ताह
संस्कार ने मनाया हिन्दी सप्ताह
19 सितम्बर 2010 को पूर्वी दिल्ली की साहित्यिक–सांस्कृतिक संस्था द्वारा हिन्दी दिवस का भव्य आयोजन किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ “असतो मा सदगमय” के उदघोष से हुआ। “ वर्षा की एक बूँद” विषय पर वक्ताओं ने काव्य अभिव्यक्तियाँ प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. हेम भटनागर ने व संचालन रिया शर्मा ने किया। मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक श्री दिनेश मिश्र जी ने वर्ष 2010-2011 के लिये संगच्छध्वं हिन्दी सम्मान श्री धर्म प्रकाश जैन को प्रदान किया। मंगल अक्षत पुरस्कार श्रीमती मंजुला श्रीवास्तव को दिया गया । हिन्दी की पुस्तकों की प्रदर्शनी 18 चित्र विहार में सप्ताह भर आयोजित की गई। मुख्य अतिथि ने अपने अभिभाषण में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये संस्कार के योगदान की सराहना की।
मीना जैन
Sunday, April 25, 2010
मीना जैन द्वारा रचित पुस्तक “बोल! चिड़िया बोल!” ( बाल कविता संग्रह ) का लोकार्पण
25/04/2010 को पूर्वी दिल्ली की साहित्यिक – सांस्कृतिक संस्था “संस्कार” द्वारा 32,स्वास्थ्य विहार में “अनुभव –आनन्द” उत्सव मनाया गया। स्वागत के पश्चात संस्कार अध्यक्षा डॉ. हेम भटनागर ने दिवंगत लेखिका व प्रख्यात रंगकर्मी डॉ. रेखा जैन को भाव भीनी श्रद्धांजली अर्पित की।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि बाल लेखिका श्रीमती इन्दिरा बागची ने इन्दिरापुरम गाजियाबाद की कवयित्री मीना जैन द्वारा रचित पुस्तक “बोल! चिड़िया बोल!” ( बाल कविता संग्रह ) का लोकार्पण किया ।पुस्तक को बालोपयोगी बताते हुए उन्होंने कविताओं की भूरि- भूरि प्रशंसा की।
द्वितीय सत्र में “उड़ि मति रे काला रे कागरा” विषय पर सदस्यों ने अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये। इस अवसर पर पुस्तक प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र रही। धन्यवाद ज्ञापन मधुलिका अग्रवाल द्वारा किया गया।
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