उदास क्षण
शिशुमयी भोले थे उसके बोल
उदास नेत्रों में भरी एक सरिता
ललाट पर भविष्य की चिंतित लहरें
उर से झलकती कहीं एक कविता
उदास वह थी उदास थी रात
उदास थी कितनी उदास थी
व्यक्त करती उसकी हर बात
न हंसती थी न रोती थी ।
Friday, November 23, 2007
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