कविता करने की अवस्था
सीने पर बन्दूक ताने आदमी खड़ा है
सोचता हूँ
गोली शायद प्रेम की निकले
भागता नहीं हूँ
इधर उधर
पहले मुझे सोन नदी का
पूर्ण सौन्दर्य नेत्रों में भर लेने दो
आकाशगंगा उतरी है
जमीन पर
आदमी की खुली पगड़ी पर
तैर रही है
सहमा हुआ हूँ
कविता लिखी नहीं गई।
Friday, November 23, 2007
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