Friday, November 23, 2007

तुम कलाकृति हो

तुम कलाकृति हो

तुम कलाकृति हो
मैने कहा
कैसे ? उसने पूछा
उसके हाथों में मेंहदी थी
पैरों में बिछुये थे
कानों में कर्णफूल

नेत्रों में
अनेक रहस्यमयी प्रश्न
मैने देखा
वह गम्भीर थी
परंतु उसने मेरी समस्त जिज्ञासा को
अपने नेत्रों में भरा
और कई प्रश्न
उसके चेहरे पर सौन्दर्य में
पिघल कर
ओठों पर हलकी स्मिति में उतर आये
कैसे ?
उसने फिर पूछा
तुम कलाकृति हो
मैने कहा।


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