आज वेदना रोती
कम्पित स्वरों में आज वेदना रोती।
जब मन बेबस होजाता,
उर पर अंकुश न आता,
अपनों से पार न पाता,
जग कोलाहल के बीच,संवेदना सोती,
कम्पित स्वरों में आज वेदना रोती।
कभी हँसता, कभी रोता,
कभी रोता, कभी गाता,
असफलतायें बुनता जाता,
स्पृहणीय नहीं मैं, चेतना सोती,
कम्पित स्वरों में आज वेदना रोती।
विकल स्वर मौन कहता,
विपद स्वर कौन कहता,
नीर नद सम बहता जाता,
बादलों से चपला की आहट होती,
कम्पित स्वरों में आज वेदना रोती।
Saturday, November 24, 2007
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