पल भर का परिचय
पल भर का परिचय
वह चेहरा
चेहरा नहीं
शिशिर की मणिभ धूप है दरख्तों पर
पिघलती नदी की आभा
हिमाच्छन्न भू पर
वह
वह एक गल्प
वह फैलती है अंतरिक्ष पर
सप्तरंगों में
रजत नीलममणि की छाया में
वह
वह अवस्थित है
जीवन के सौन्दर्य के नृत्य के संगीत में।
Friday, November 23, 2007
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