संभावनाएं
न जाने क्या है
जो निकलना चाहती है
जलवृक्ष या सिमार
अंतःकरण के बाहर
वह सर्प है या मगर
जो हृदय पर लोटता है
कुछ निगलने को
क्या कुछ पाने को
केक्टस या गुलखेरा के फूल
नीलाकाश को सिमटता है
मकड़ियाँ अपने ही बनाये जाले पर दौड़्ती हैं
मेरे अन्दर का नन्हा शिशु उदास है
क्या कहेगा
माँ के पेट के अन्दर है
यह कल्पना कितनी विचित्र लगती है
विहगों के सफेद अण्डों को देखकर कि
ये फुदक फुदक कर उड़ती हैं
और दौड़्ती हैं
समुद्र के पार।
Friday, November 23, 2007
संभावनाएं
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