Saturday, November 24, 2007

पथ के बच्चों के नाम

पथ के बच्चों के नाम

बसन्त पर फूल खिलते हैं कहते हैं यौवन के
आभूषणों से सजते हैं पौधे वस्त्र उतार जीर्ण
पके खेतों में विचरती हैं उल्लसित हो नारियाँ
अठखेलियाँ करती हैं चंचल गेहूँ की बालियाँ
भू को सजाती हैं सरसों आह्लाद से फूलकर
सन्देश अभिसार के देते हैं फाख्ता आ आकर
आशा देती है मन को कोयल कुहू कुहू कर
बोलता हर पल मेरा मन परन्तु विपद स्वर
कहाँ है इन बच्चों की उम्र का वसन्तोत्सव?
कहाँ आशा नव? सन्देश नव ? जीवन नव?
कब आयेगा? इन बच्चों का उत्थान दिवस
क्या लिखूँगा ? कभी मैं इनके गीत उलस

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