Friday, November 23, 2007

सुनाता हूँ कहानी मैं एक छात्र की

सुनाता हूँ कहानी मैं एक छात्र की


सुनाता हूँ कहानी मैं एक गरीब छात्र की
मेधावी था और था दुनियादारी से नादान
सरल था और था इश्क के नाम से अनजान
देखा एक दिन उसने भू पर एक नीला चाँद
गुमशुदा हुए होश और लुटा दिया अपना दिल
उसके लोचन से निकली इश्क की किरन मधुर
खुशबू थी एसी कि जो हर श्वांस में भर गई
हर लफ्ज़ में उसके उसका नाम रख गई
हर पुलक में उसकी पुलक हर सिहरन में इश्क
उसकी मुस्कराहट से छा गई लज़ीली स्मिति
एक दिन उसने उससे पूँछने का किया दुःसाहस
नहीं करती, हिम्मत कैसे हुई युवक तुम्हारी
दो शब्द की यह बात जिन्दगी को तूफान गई
लुटी जिन्दगी पल भर में लुट गए अरमान सब
हिम सा शीतल दिल उसका धधकता सूरज बना
और वह सदा सदा को प्रेम की कब्र में सो गया।

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