सुनाता हूँ कहानी मैं एक छात्र की
सुनाता हूँ कहानी मैं एक गरीब छात्र की
मेधावी था और था दुनियादारी से नादान
सरल था और था इश्क के नाम से अनजान
देखा एक दिन उसने भू पर एक नीला चाँद
गुमशुदा हुए होश और लुटा दिया अपना दिल
उसके लोचन से निकली इश्क की किरन मधुर
खुशबू थी एसी कि जो हर श्वांस में भर गई
हर लफ्ज़ में उसके उसका नाम रख गई
हर पुलक में उसकी पुलक हर सिहरन में इश्क
उसकी मुस्कराहट से छा गई लज़ीली स्मिति
एक दिन उसने उससे पूँछने का किया दुःसाहस
नहीं करती, हिम्मत कैसे हुई युवक तुम्हारी
दो शब्द की यह बात जिन्दगी को तूफान गई
लुटी जिन्दगी पल भर में लुट गए अरमान सब
हिम सा शीतल दिल उसका धधकता सूरज बना
और वह सदा सदा को प्रेम की कब्र में सो गया।
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