यही सत्य है एक
झुरमुट से निकली है रुपहली चाँदनी
चाँद आज नया होकर आया है
छन रही त्रणों से एक मादक गंध
ज़मीं ने आज प्यार का गीत गाया है
यौवन खिल रहा उगते सूरज की तरह
देह पर आज मदिर नशा छाया है
आकाश ने बनाए हैं शत शत दीप
प्रभंजन आज खुशी का गुबार लाया है
खुश रहो और खुशी में लुटा दो प्राण
ज़हाँ में अपने गीतों का भर दो संगीत
कोई नहीं है फिर भी है कोई
सारा जगत आज बना है मेरा मीत
मायूसी छोड़ो रोना छोड़ो
अपनी मुस्कराहटों से बनाओ स्वर्ग
खुश को खुशी और दुखी को दुख
समझा मैं रहस्य यही है एक सत्य।
Friday, November 23, 2007
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