Saturday, November 24, 2007

दौड़ने लगा संतरे के बागों की ओर।

धानी नदी के जल में
स्नान के बाद
ज्योंही मैं निकला
एक धमाका हुआ
खरगोश व हिरन दौड़ने लगे
एक और धमाका हुआ
गायें व बकरियाँ दौड़ने लगीं
एक और धमाका हुआ
श्वान,सियार व लौमड़ियाँ दौड़ने लगीं
मैं उस शिकारी को खोज रहा था
जिसके हाथ की बन्दूक से
जंगल आतंकित हो गया था
तभी
मैंने घोड़ों पर शिकारियों को
अपनी और आते हुए देखा
मैंने जल्दी जल्दी कपड़े पहने
और दौड़ने लगा संतरे के बागों की ओर।

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