एक सुन्दर पक्षी नीलकण्ठ वृक्षों के पास की दीवार पर बैठता है ।वह मौन बैठा रहताहै।एक कौआ आता है और उस दीवार पर दूर बैठ जाता है।कौआ धीरे धीरे नीलकण्ठ के समीप खिसकता जाता है। नीलकण्ठ मौन उसको निहारता रहता है। कौआ और पास आकर उससे सटकने की कोशिश करता है।नीलकण्ठ उछल कर दूर बैठ जाता है। क्रुद्ध कौआ तब नीलकण्ठ के पंखो पर अपनी चोंच मारता है।बेचारा पक्षी कातर दृष्टि से कौवे की ओर देखता है।कौआ नीलकण्ठ को असहाय समझ कर उसके पंखो पर लगातार चोंच मारता है। वह कौवे की धृष्टता से बचने के लिए और कोई रास्ता स्वयं को बचाने का न पाकर उड़कर एक वृक्ष की लचकती डाली पर बैठ जाता है।
सज्जन व्यक्ति दुर्जनों से इसी प्रकार छुटकारा पाते हैं।
Saturday, November 24, 2007
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