क्या भावना क्रीड़ा की मधुर शैली ?
आवारा मन न जाने किधर विचरण करता
अंवेषक मन न जाने क्या खोजता रहता
चिर प्रतीक्षित नेत्र न जाने क्या निहारते
किंकर्तव्यविमूढ़ मनस क्या सोचता रहता
पुष्प अधखिले उद्विग्न अभिलाषा मृग मरीचका
विश्व स्वप्न क्या भावना सृष्टि क्रीड़ा की मधुर शैली ?
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