हवा चल रही प्यार की
बयार चल रही है प्यार की
गीत न गुन गुनाऊँ तो क्या करूँ
यह पल कह रहा है प्यार कर
स्वप्नों में न सो जाऊँ तो क्या करूँ
दरख्तों ने खोल दी हैं बाहें
फूलों ने ले लिया मेरा चुम्बन
मसल रही है हाथों को कोई
अनजानी सौन्दर्य लता
विहागावलि के कलरव में
खो गया मेरा संगीत तन
कोई स्फुरण आया एकाएक
न जाने क्या उल्लास भर गया
आसमान की नीली साड़ी में
उलझ गया मेरा मन
आँचल गिरा तभी चाँद का
मैं परियों की गोद में सो गया।
Friday, November 23, 2007
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment