नदी का किनारा
नदी का किनारा
मस्ती भरी हवा है
हँसो की जोड़ी
स्वर्ग सी जगह है
मैं हूँ कितना अकेला
जैसे कटता किनारा
दुपहरी का सूरज
जल की बहती ठँड़ी धारा
कैसे गुजरे दिन
अगर जल करें अठखेली
मछुआरे जाने को हैं
दिल कहता
मैं हुआ तुम्हारा
न भी आओ तुम
फिर क्या
चाँद हमारा है
नदी का किनारा
मस्ती भरी हवा है।
Saturday, November 24, 2007
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