Saturday, November 24, 2007

प्रिय टूटी तमन्नाओं का चाँद बन कर चली आ

प्रिय टूटी तमन्नाओं का चाँद बन कर चली आ

प्रिय टूटी तमन्नाओं का चाँद बन कर चली आ
पंक का पंकज है उजड़े दिलों का गीत बन कर चली आ
अनगिनत सितारों में खोजा है मेरा मीत बन कर चली आ
अब हो चला दिल मेरा बेबस अरमान बन कर चली आ
प्रतीक्षारत नेत्र श्रांत समय बन कर चली आ
कैसे हैं कदम सुगन्ध बन कर चली आ
परी है, देवी है, पवन है ,क्या है, सम्प्रति चली आ।

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