पश्चाताप
चुभते हैं शूल की तरह
जब भी याद करते हैं
अपनी कही हुई गलत बातें
या अपने कुकृत्य
जानबूझ कर किये हुए
या अनजाने में
या परिस्थितिवश
या असहायावस्था में,
बोझ हैं हृदय पर
मैं उनको हटा नहीं पाता।
वे खुश नसीब हैं
जो रख देते हैं
उनको ईश्वर के सिर के ऊपर
और बुलबुले की तरह
उड़ा देते हैं हवा में,
या जो नियतिवादी हैं
भूल जाते हैं उनको
शकुंतला के दुष्यंत की तरह।
मैं सोचता हूँ
वे खुश नसीब भले ही हों
परंतु नहीं रोक सकते
स्वयं को उन
ट्रुटियों की पुनरावृत्ति से,
वे जीते हैं
सियार के समान
दोषों से छिटके संसार में।
परन्तु विषाद भरा मैं
चाहता हूँ
उन दोषों को न दोहराऊँ
और जीऊँ
उनके भय से चौकस
जंगल में खड़े बारहसिंघे की तरह्।
चुभते हैं शूल की तरह
जब भी याद करते हैं
अपनी कही हुई गलत बातें
या अपने कुकृत्य
जानबूझ कर किये हुए
या अनजाने में
या परिस्थितिवश
या असहायावस्था में,
बोझ हैं हृदय पर
मैं उनको हटा नहीं पाता।
वे खुश नसीब हैं
जो रख देते हैं
उनको ईश्वर के सिर के ऊपर
और बुलबुले की तरह
उड़ा देते हैं हवा में,
या जो नियतिवादी हैं
भूल जाते हैं उनको
शकुंतला के दुष्यंत की तरह।
मैं सोचता हूँ
वे खुश नसीब भले ही हों
परंतु नहीं रोक सकते
स्वयं को उन
ट्रुटियों की पुनरावृत्ति से,
वे जीते हैं
सियार के समान
दोषों से छिटके संसार में।
परन्तु विषाद भरा मैं
चाहता हूँ
उन दोषों को न दोहराऊँ
और जीऊँ
उनके भय से चौकस
जंगल में खड़े बारहसिंघे की तरह्।

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