Monday, September 10, 2012

कार्यालय

कार्यालय




नारंगी रंग से सिक्त

काफी कप

पीली टीक की मेज पर स्थिर है अंगुलियाँ

सफेद बगुले से सराबोर हो लेपटोप पर लिखती है एक ओर दूरभाष

और है घूमता हुआ फलक निर्द्वन्द

कौन कहता है

यहाँ कार्य नहीं होता

(भले ही फाइलें और कागज

त्रिघातिय में न हों) पल पल पर रिंग टोन

आती हैं

चिन्नै , बढ़ोदा, जोरहट व मुम्बई की

बिहारी की सतसई से कम संक्षिप्त नहीं

नीली मयूर पंख की

तूलिका अदृश्य

समायोजित करती है

सहायता प्रपट व तकनीकी

सोडियम व मर्करी

लेम्पों से होता है

छाया व प्रकाश का संयुक्त वितरण स्पन्दन

पर्दों से छन छन कर

आती है सुगन्धि अकृत्रिम

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बाघ घुमावदार मार्ग पर पिंजड़े में बन्द हैं।